युवा तुर्क, कुशीनगर
कुशीनगर के महापरिनिर्वाण स्थल से विश्व शांति का संदेश देने वाला ‘अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन 2026’ मंगलवार से शुरू हो गया। 31 मार्च से 2 अप्रैल तक चलने वाले इस तीन दिवसीय आयोजन में देश-विदेश से आए बौद्ध भिक्षु, संत, विद्वान, नीति-निर्माता और युवा एक मंच पर जुटे हैं। सम्मेलन में भगवान बुद्ध की करुणा, शांति और शिक्षाप्रद संदेशों की वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में प्रासंगिकता पर गहन मंथन किया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि ‘वर्तमान समय में जब दुनिया के अनेक हिस्सों में संघर्ष और अनिश्चितता का माहौल है, ऐसे समय में भगवान बुद्ध के जीवन संदेश सकारात्मक मार्ग प्रशस्त करते हैं। उन्होंने बताया कि कुशीनगर में आयोजित यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन वैश्विक स्तर पर शांति, सहअस्तित्व और आपसी समझ को मजबूत करने की दिशा में एक अहम पहल है।’

अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन का शुभारंभ:
कुशीनगर के महापरिनिर्वाण मंदिर में 31 मार्च को अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन का शुभारंभ मंत्रोच्चार के साथ हुआ। इसके बाद ‘बुद्धा लाइफ गैलरी’ का उद्घाटन किया गया। उत्तर प्रदेश के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह ने दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की। इस अवसर पर कुशीनगर के जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने अतिथियों का स्वागत किया। आरआईएस के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पंकज वशिष्ठ ने ‘बौद्ध दर्शन’ की आज के दौर में प्रासंगिकता पर अपने विचार रखे। सम्मेलन में ‘बुद्धाज कुशीनगर’ विषय पर एक लघु फिल्म भी प्रदर्शित की गई। वहीं, स्थानीय विधायक और सांसद ने भी सम्मेलन की अहमियत को रेखांकित करते हुए अपने विचार साझा किए।
‘धम्म, संवाद और विकास’ पर प्रतियोगिता:
शांति उपवन में ‘धम्म, संवाद और विकास’ विषय पर छात्र चित्रकला प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने भाग लिया। बच्चों ने कलाकृतियों के माध्यम से बौद्ध शिक्षा एवं मूल्यों को सृजनात्मक ढंग से अभिव्यक्त किया।
‘भिक्षुओं के दृष्टिकोण से बौद्ध धर्म’ पर विमर्श:
उद्घाटन सत्र के पश्चात सम्मेलन के शैक्षणिक सत्रों का शुभारंभ हुआ। प्रथम सत्र ‘भिक्षुओं के दृष्टिकोण से बौद्ध धर्म’ विषय पर केंद्रित रहा, जिसमें बौद्ध दर्शन के व्यावहारिक एवं आध्यात्मिक पहलुओं पर विचार-विमर्श किया गया। इसके बाद ‘बौद्ध-जैन समागम’ विषय पर आयोजित सत्र में दोनों धर्मों की समानताओं, ऐतिहासिक संबंधों एवं समकालीन प्रासंगिकता पर चर्चा हुई। सम्मेलन के तीसरे सत्र में उस वक्त माहौल खास हो गया, जब उत्तर प्रदेश सरकार के पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम ने मुख्य वक्तव्य दिया। अपने संबोधन में उन्होंने प्रदेश के समृद्ध बौद्ध स्थलों, पर्यटन आकर्षणों, पारंपरिक कला-शिल्प और सांस्कृतिक विरासत की व्यापक तस्वीर प्रस्तुत की।
द० कोरिया, लाओस, जापान के प्रतिनिधियों ने रखे विचार:
अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन के पहले दिन ‘बौद्ध धर्म : धम्म, संवाद और विकास’ विषय पर पैनल चर्चा आयोजित की गई। परिचर्चा में दक्षिण कोरिया, लाओस, जापान और भारत के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया।
‘बोधि यात्रा’ का प्रमुख केंद्र बन रहा यूपी- अपर मुख्य सचिव:
अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग अमृत अभिजात ने बताया कि ‘उत्तर प्रदेश अंतरराष्ट्रीय बौद्ध पर्यटन मानचित्र पर तेजी से अपनी सशक्त पहचान बना रहा है। उन्होंने बताया कि भगवान बुद्ध के जीवन से जुड़े छह प्रमुख स्थल- कुशीनगर, सारनाथ, श्रावस्ती, संकिसा, कपिलवस्तु और कौशांबी, इसी प्रदेश में स्थित हैं। यही वजह है कि दुनिया भर के बौद्ध श्रद्धालु अपनी ‘बोधि यात्रा’ की शुरुआत उत्तर प्रदेश से करना पसंद कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि राज्य के 12 पर्यटन सर्किटों में बौद्ध सर्किट एक अहम केंद्र के रूप में उभरा है। प्रदेश सरकार की ओर से पर्यटन सुविधाओं के विस्तार, बेहतर कनेक्टिविटी और परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के चलते पर्यटकों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है, जो सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।’
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