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Friday, May 1, 2026
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यूपी के सभी किलों का होगा संरक्षण: योगी

बुद्धादर्शन न्यूज, नई दिल्ली मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि प्रदेश के सभी किलों को संरक्षित किया जाएगा। इस बाबत एक आध्यात्मिक सर्किट बनाया जाएगा। इसमें चुनार का किला, झाँसी किला, कालिंजर किला आदि को शामिल किया जाएगा। टूरिस्ट बुकलेट से ताजमहल गायब होने पर मुख्यमंत्री ने बताया कि चूंकि बौद्ध सर्किट व आध्यात्मिक सर्किट पर काम होने के साथ ताजमहल के लिए अलग प्रोजेक्ट बनाया गया है। ताजमहल के लिए अलग से प्रोजेक्ट बनाए जाने की वजह से बुकलेट में दूसरे पर्यटन स्थलों को जगह मिली। ताजमहल के संरक्षण का काम तो सरकार कर ही रही है। मुख्यमंत्री ने 23 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित होने वाले विभिन्न पर्यटन परियोजनाओं का शिलान्यास किया। उन्होंने प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत तीन सड़कों का शिलान्यास तथा कप्तानगंज तथा कप्तानगंज तहसील व कसया तहसील में निर्मित आवासीय भवना ें का लोकार्पण भी किया। उन्होंने बौद्ध भिक्षुओं की समस्याओं के निवारण के लिए जिलाधिकारी को निर्देश दिया और समन्वय स्थापित करने को भी कहा। उन्होंने कहा कि प्रदेश के छह क्षेत्रों में पर्यटन स्थल भगवान बुद्ध से जुड़े हैं। यहां जल्द ही पर्यटकों के लिए टूरिस्ट पुलिस का गठन किया जाएगा। माथा कुंवर स्टाप पर सीसीटीवी कैमरा, पेयजल, पार्किंग, लाइट एंड साउंडस महापरियोजना पर सोलर लाइट इत्यादि का इंतजाम,  रामाभार स्तूप पर सोलर लाइट्स, सीसीटीवी कैमरा व पेयजल की व्यवस्था करने का निर्देश दिया। इस मौके पर पर्यटन मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने कहा कि पर्यटन को प्रत्येक क्षेत्र में बढ़ावा दिया जाएगा। ताकि रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध हों।

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भगवान धन्वंतरि की जयंती पर राष्ट्र को आयुर्वेद ‘एम्स’ का तोहफा

बुद्धादर्शन न्यूज, नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि की जयंती (धनतेरस) पर मंगलवार को राष्ट्र को अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान ‘एम्स’ का तोहफा किया। इस मौके पर उन्होंने देश के प्रत्येक जिला में आयुर्वेद  अस्पताल खोलने की घोषणा की। प्रधानमंत्री ने कहा कि कोई भी देश अपने इतिहास और विरासत को महत्व और ध्यान दिए बिना प्रगति नहीं कर सकता। जो देश अपनी विरासत को पीछे छोड़ देते हैं वह अपनी पहचान भी खो देते हैं। दुनिया अब प्रकृति और सेहत की ओर लौट रही है। आयुर्वेद भारत की ताकत है। Prime Minister Narendra Modi on Tuesday inaugurated the first ever 200-bed ayurveda hospital on the lines of All India Institute of Medical Sciences (AIIMS) in New Delhi and said his government plans to establish such traditional medical institutes in every district of the country. प्रधानमंत्री ने सूचना क्रांति की तरह आयुर्वेद क्रांति लाने का आह्ववान किया। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद दिवस या योग दिवस के लिए एकत्र हुए लोगों को देखकर हमारी विरासत में गर्व प्रदर्शित होता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आयुर्वेद सिर्फ एक चिकित्सा पद्धति नहीं है बल्कि है सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं पर्यावरण स्वास्थ्य को जोड़ने वाली एक प्रणाली है, इसलिए सरकार ने आयुर्वेद , योग और अन्य आयुष पद्धतियों को प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली में शामिल करने के लिए बल दिया था। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 3 वर्षों के दौरान 65 से भी अधिक आयुष अस्पतालों का विकास किया गया है। स्वास्थ्य देखभाल लोगों की बेहतर पहुंच बनाने के लिए नए एम्स की स्थापना की जा रही है। उन्होंने स्टेंट और घुटना इम्प्लांट्स की कीमतों पर सीमा तथा किफायती कीमतों पर दवाईयां प्रदान करने के लिए जन औषधि केंद्रों की स्थापना जैसे उपायों का भी उल्लेख किया। आयुर्वेद के विकास के लिए प्रधानमंत्री के सुझाव- आयुर्वेद विशेषज्ञ एलोपैथी जैसी आयुर्वेदिक दवाएं तैयार करें। जिनसे तुरंत राहत मिले और कोई दुष्प्रभाव न हो। दवाओं की बेहतर पैकिंग हो। आयुर्वेद को बढ़ावा देने के लिए कॉरपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी फंड का उपयोग करें। मौजूदा पाठ्यक्रम का पुनर्निर्धारण हो ताकि मानक स्तर कायम हो। आयुष व कृषि मंत्रालय किसानों को औषधीय फसलें लगाकर आय बढ़ाने की सलाह दें। आयुर्वेद संस्थान की खासियत- नई दिल्ली के सरिता विहार क्षेत्र में 10 एकड़ में लगभग 157 करोड़ रुपए की लागत से विकसित किया गया है। यहां कई क्षेत्र में पोस्ट-ग्रेजुएट और पीएचडी प्रोग्राम शुरू होगा।  पंचकर्म टेक्नीशियन कोर्स भी करवाया जाएगा। यह दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध है। यहां बाल रोग, मौलिक सिद्धांत, पंचकर्म, प्रसूति और स्त्री रोग, शल्य तंत्र विभाग हैं।

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पहले थें सीमेंट कंपनी के प्रेसिडेंट, अब गांव में साइंस गुरू बन गए पटेल राजेंद्र प्रसाद

  -रिटायर्ड लोग साइंस गुरू से लें प्रेरणा   बुद्धादर्शन न्यूज, नई दिल्ली जो लोग रिटायरमेंट के बाद जीवन को डूबता सूरज की नजर से देखने लगते हैं, उनके लिए पटेल राजेंद्र प्रसाद सर, एक उजाले की तरह हैं। ऐसे लोग राजेंद्र प्रसाद के जीवन से प्रेरणा लेते हुए खुद को ऊर्जावान बना सकते हैं। मूलरूप से उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के रामपुर ढबही गांव (स्माईल पिंकी का गांव) के निवासी पटेल राजेंद्र प्रसाद जिंदल सीमेंट कंपनी में एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट के पद से पिछले साल रिटायर्ड हुए। हालांकि 60 साल पूरा होने के बावजूद कंपनी राजेंद्र प्रसाद का कार्यकाल बढ़ाना चाहती थी। अन्य सीमेंट कंपनियां भी राजेंद्र प्रसाद को नौकरी का ऑफर दिया, लेकिन राजेंद्र प्रसाद ने रिटायरमेंट के बाद अपनी बुजुर्ग मां की सेवा करने और ग्रामीण युवाओं को सही मार्गदर्शन देने के लिए गंगा किनारे स्थित अपने पैतृक जिला मिर्जापुर को अपनी कर्मस्थली बनाने का फैसला किया और पिछले एक साल की कड़ी मेहनत और लगन से आपको मिर्जापुर से नेशनल साइंस कांग्र्रेस के लिए चुना गया है। इसके अलावा आपको जिला साइंस क्लब का स्थायी स्पीकर बनाया गया है। अमूमन देखा जाता है कि रिटायरमेंट के बाद अधिकांश लोगों की दिनचर्या खराब हो जाती है, जिसकी वजह से ऐसे लोगों का स्वास्थ्य भी खराब होने लगता है। ऐसे लोगों को राजेंद्र प्रसाद से प्रेरणा लेने की जरूरत है, ताकि वे रिटायरमेंट के बाद भी सही ढंग से जीवन का सदुपयोग कर सकें और खुद को स्वस्थ रख सकें। बेल्लारी में लगाए 15 हजार नीम के पौधे-  राजेंद्र प्रसाद ने सूरत से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद अधिकांश समय महाराष्ट्र, कनार्टक में 35 सालों तक उच्च पदों पर नौकरी की। पर्यावरण के प्रति लगाव की वजह से राजेंद्र प्रसाद ने नौकरी पीरियड के दौरान बेल्लारी में 15 हजार नीम के पौधे लगाए। इसके अलावा अन्य विभिन्न देसी प्रजाति के पौधों को भी लगाया। गांव में खोले डेयरी फार्म-  रिटायरमेंट के बाद राजेंद्र प्रसाद ने गांव में गौशाला खोले हैं। सोलर पैनल भी लगाए हैं। जल्द ही युवाओं के लिए सस्ती दर पर कोचिंग की सुविधा उपलब्ध करवाने की योजना बना रहे हैं। इसके अलावा गोबर गैस संयंत्र, मेडिसिनल प्लांट भी लगाएंगे। छात्रों को करते हैं मोटिवेट- इन सभी कार्याें के अलावा राजेंद्र प्रसाद अपने बचे हुए समय में विभिन्न स्कूलों में जाकर छात्रों को मोटिवेट करते हैं। उन्हें बदलते समय के साथ एजुकेशन फिल्ड में आने वाली चुनौतियां, पर्यावरण इत्यादि के बारे में बताते हैं।

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पुणे में संपन्न हुआ ‘द बुद्धिस्ट सोसायटी ऑफ इंडिया’ का राष्ट्रीय अधिवेशन

  बुद्धादर्शन न्यूज, नई दिल्ली ‘द बुद्धिस्ट सोसायटि ऑफ इंडिया’ का दो दिवसीय अधिवेशन 7  व 8 अक्टूबर को महाराष्ट्र के पुणे शहर के पिम्पली रंगास्वामी नगरपालिका मैदान पर आयोजित हुआ। कार्यक्रम में ‘द बुद्धिष्ट सोसायटी ऑफ इंडिया’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रबोधि पाटिल सहित कई राज्यों के प्रदेश अध्यक्ष और हजारों लोग शामिल हुए। अधिवेशन का आयोजन दो सत्र में किया गया। पहले सत्र में सेंट्रल कमिटी मीटिंग हुई, जिसमें कई अहम फैसले हुए। दूसरे सत्र में भगवान बुद्ध और बाबा साहब के जीवन पर प्रकाश डाला गया।

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ग्रामीण क्षेत्रों के 70 लाख स्कूली बच्चों को दिए जाएंगे सोलर लैम्प

  बुद्धादर्शन न्यूज, नई दिल्ली भारत सरकार जल्द ही देश के ग्रामीण क्षेत्रों में पढ़ने वाले 70 लाख स्कूली बच्चों को सोलर लैम्प वितरित करेगी। ये लैंम्प मुंबई आईआईटी के विशेषज्ञ विकसित कर रहे हैं। इस बाबत भारत सरकार के ऊर्जा विभाग के अंतर्गत आने वाली संस्था ईईएसएल ईनर्जी एफिसिएंसी सर्विसेज लिमिटेड (ईईएसएल) और मुंबई आईअाईटी के बीच अनुबंध करार हुआ है। The objective of this program is to provide clean light for study purpose to every child in the country in the fastest and most cost­effective manner. सोलर लैम्प की कीमत 600 रुपए निर्धारित की जाएगी, लेकिन बच्चों को यह लैम्प केवल 100 रुपए में उपलब्ध कराई जाएगी। शेष 500 रुपए का भुगतान भारत सरकार करेगी। योजना की शुरूआत देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और महाराष्ट्र से की जाएगी। हालांकि पिछले साल तत्कालीन ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल ने सोलर ऊर्जा लैम्प के लिए मुंबई आईआईटी को 1800 करोड़ रुपए की सहायता राशि देने और इसके तहत 10 करोड़ स्कूली बच्चों को सोलर लैम्प उपलब्ध कराने की घोषणा की थी। इस योजना का मुख्य लक्ष्य देश के प्रत्येक बच्चे को पढ़ने के लिए सोलर लैम्प उपलब्ध कराना है।

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यमुना को प्रदूषणमुक्त करने सात समुंदर पार शुरू हुआ कैंपेन, प्रवासी भारतीयों की पहल

बुद्धादर्शन न्यूज, नई दिल्ली यमुना के प्रदूषण को लेकर सात समुंदर पार रहने वाले प्रवासी भारतीय भी चिंतित हैं। यह चिंता उस समय ज्यादा बढ़ जाती है जब ये भारतीय अपने धर्म स्थलों का दर्शन करने स्वदेश आते हैं और ऑक्सीजन रहित यमुना के जल को देखकर भावुक हो जाते हैं। यमुना को प्रदूषणमुक्त करने के लिए ये भारतीय लंदन में ऑनलाइन कैंपेन चला रहे हैं, इसी के तहत ऑनलाइन पीटिशन भी शुरू की गई है, जिसके जरिए ब्रिटिश सरकार पर दबाव डालने की कोशिश की जाएगी, ताकि यमुना को प्रदूषणरहित करने के लिए ब्रिटिश सरकार तकनीकी तौर पर भारत सरकार का सहयोग करे। प्रवासी भारतीयों के इस अभियान में वहां के स्थानीय सांसदों का भी सहयोग मिल रहा है।  इंग्लैंड में गुजरात से संबंध रखने वाले राकेश राजपारा और साधना बेन नामक महिला ने ‘हेल्प असिस्ट इन रिजुविनेटिंग द सैक्रेड होली यमुना रिवर कैंपेन यूके’ नाम से अॉनलाइन पीटिशन शुरू किया है। राकेश राजपारा कहते हैं, ‘10 हजार हस्ताक्षर होने पर इंगलैंड की सरकार इसे स्वीकार करेगी और एक लाख हस्ताक्षर पूरा होने पर इस पर चर्चा करने का विचार होगा।’ इस अभियान को स्थानीय काउंसिलर मंजुला सूद, लिसेस्टर ईस्ट से ब्रिटिश लेबर पार्टी के संसद कीथ वॉज, लॉर्ड मेयर रश्मिकांट जोशी का भी समर्थन प्राप्त है। आस्था का केंद्र है यमुना- पीटिशन में कहा गया है कि पूरी दुुनिया के लाखों श्रद्धालु भारत में बहने वाली पवित्र यमुना नदी के वृंदावन, मथुरा और गोकुल में पूजा करने आते हैं। इस नदी से हम सभी की आस्था जुड़ी है। लेकिन आज यह नदी बहुत ज्यादा प्रदूषित हो गई है। संयुक्त राष्ट्र संघ इस नदी को मृत घोषित कर चुका है। नदी में ताजा पानी नहीं है। श्रद्धालुओं को नदी के गंदे पानी में पूजा करने को मजबूर होना पड़ता है। तकनीकी सहयोग करे ब्रिटिश सरकार- बुद्धादर्शन से बातचीत में साधना बेन कहती हैं कि कैंपेन के जरिए हम UK Govt.  से निवेदन कर रहे हैं कि नदी को प्रदूषणमुक्त करने के लिए भारत सरकार का सहयोग करे। ताकि यमुनोत्री से इलाहाबाद तक स्वच्छ पानी का बहाव हो। यमुना नदी, एक नजर: लंबाई - 1376 किलोमीटर दिल्ली में कुल लंबाई- 46 किलोमीटर दिल्ली में यमुना का प्रदूषित हिस्सा- वजीराबाद बैराज से ओखला बैराज तक 22 किलाेमीटर Zero oxygen in yamuna in Delhi- दिल्ली में यमुना में 17 नालों के जरिए औद्योगिक एवं घरेलू कचरा गिरता हैं। राजधानी में 1600 से ज्यादा अनॉधिकृत कॉलोिनयां हैं, जिनमें से अधिकांश में अभी तक सीवर लाइन नहीं डाली गई है। इन कॉलाेनियांे का अधिकांश कचरा नालों के जरिए नदी में प्रवाहित होता है। इसकी वजह से वजीराबाद बैराज से ओखला बैराज के बीच 22 KM के दायरे में Oxygen की मात्रा zero है। Help Assist in Rejuvenating the Sacred Holy Yamuna River Yamuna River (India), is worshipped by millions of devotees all around the world through pious banks of Vrindavan, Mathura and Gokul. The river has many spiritual significance to all. This very river is polluted with toxic industrial and domestic waste from Delhi and other drains United Nation has declared the Yamuna River dead. There is no fresh flow, flowing through whole stretch. Devotees are forced to take a sip, bath and perform religious activities in these toxic polluted waters. We urge the UK Government to assist the Indian Government to treat their Industrial and Domestic waste and not to pour treated or untreated waste water into Yamuna River. Furthermore ensure adequate natural flow of fresh water throughout the stretch,which starts from Yamunotri to Allahabad Please sign this petition here - https://petition.parliament.uk/petitions/200950

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तीन साल की बेटी की परवरिश जरूरी, अनामिका नहीं बन सकीं साधु

Buddhadarshan News, New Delhi सौ करोड़ की संपत्ति का मालिक सुमीत राठौड़ और उनकी पत्नी अनामिका ने शांति की तलाश में अपना घर-बार त्यागकर जैन साधु बनने का फैसला लिया। लेकिन दंपत्ति की तीन साल की बेटी इभ्या के पालन-पोषण को देखते हुए फिलहाल केवल सुमित ही गुजरात के सूरत शहर स्थित वृंदावन पार्क में जैन साधु के तौर पर दीक्षा ले सके हैं। अब सुमित राठौर जैन साधु समित मुनि कहलाएंगे। फिलहाल उनकी पत्नी अनामिका को इंतजार करना पड़ेगा। Suspense over a Madhya Pradesh-based Jain couple  for deciding to leave behind a three-year-old daughter and Rs 100 crore in property for monkhood, continued on last Saturday after only the husband took his vows and the wife, Anamika’s ceremony was postponed. Saint Ramlal said 34-year-old Anamika’s initiation would be held after completion of legal formalities. मध्य प्रदेश के नीमच शहर के व्यावसायी नाहरसिंह राठौर के बेटे और बहू ने करीब 100 करोड़ की संपत्ति, तीन साल की बेटी को छोड़ पिछले महीने संन्यास धारण करने का फैसला लिया। लेकिन 23 सितंबर को गुजरात के सूरत में 34 वर्षीय सुमित ने जैन रीति-रिवाज से साधु बन गए, लेकिन  34 साल की पत्नी अनामिका का दीक्षा कार्यक्रम फिलहाल टल गया। अनामिका की तीन साल की बेटी इभ्या के पालन-पोषण को लेकर स्वयंसेवी संस्थाओं ने नेशनल हृयूमन राइट्स कमिशन में भी शिकायत की थी। अनामिका की इच्छा काे पति ने किया पूरा- सुमित और अनामिका की शादी चार साल पहले हुई थी। अनामिका शुरू से ही धर्म के प्रति अत्यधिक आस्था रखती थी। शादी के बाद अनामिका के पति सुमित का भी धर्म के प्रति लगाव बढ़ गया और अंतत: दोनों ने साधु बनने का फैसला लिया। हालांकि दंपत्ति को अपने परिवारों को मनाना बेहद मुश्किल था। लेकिन धर्म के प्रति गहरी आस्था देखते हुए उनके परिजन भी राजी हो गए।

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